Sunday, 8 March 2020

Banking economy

यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर के खिलाफ 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश, 44 महंगी पेंटिंग और दर्जनों कथित शेल फर्में ईडी की जांच का हिस्सा है। स्पेशल कोर्ट ने राणा कपूर को 11 तारीख तक रिमांड पर भेज दिया है। 

राणा कपूर की बेटियां भी इस मामले में फस सकती है क्योंकि डीएचएफएल को यस बैंक ने लोन दिया और डीएचएफएल ने राणा कपूर की बेटियों की कंपनी को 600 करोड़ दिए थे।

देश की जनता को मालूम नहीं मगर कांग्रेस ने 2008 से 2014 के बीच बैंकिंग सेक्टर को बर्बाद करने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। ऐसा शायद इसलिए किया क्योंकि कांग्रेस को उम्मीद थी के 2009 में उसकी सरकार नहीं बनेगी इसलिए बड़े घोटालों को अंजाम देना शुरू किया गया जो लगातार 2014 तक जारी रहा।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत की बैंकों ने 1947 से 2008 तक 18 लाख करोड़ रुपए ऋण के रूप में बांटे थे। लेकिन 2008 से 2014 के बीच 6 सालों में 34 लाख करोड़ रुपया ऋण के रूप में बैंकों द्वारा उद्योगपतियों को लुटाया गया। इसके पीछे टेलीफोन बैंकिंग अर्थात कांग्रेसी नेताओ के कहने पर डिफॉल्टर्स को लोन रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पैसा दिया गया। 2014 आते आते बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह तबाह हो चुका था। जब मोदी जी को सत्ता मिली तब ये देखकर उनके पैरों से जमीन खिसक गई। उस बीच धूर्त कांग्रेसी श्वेत पत्र लाने की मांग कर रहे थे अगर मोदी जी ने समझदारी से काम न लिया होता और श्वेत पत्र ले आए होते तो बैंकिंग सेक्टर की लंका लग चुकी होती, साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाती।

जब इन सब मामलों की जांच शुरू हुई तो मोदी सरकार ने चूड़ियां टाइट करनी शुरू की, लूप होल्स को बंद करना शुरू किया, कार्यवाही शुरू हुई तो एक एक करके माल्या नीरव जैसे बड़े आर्थिक अपराधी देश छोड़कर फरार होने लगे। तब इन धूर्त कांग्रेसियों ने इसको मुद्दा बनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन मोदी जी के ईमानदार प्रयासों के आगे ये धूर्त चाल भी नाकाम ही रही। 

जांच आगे बढ़ती गई तो और भी कई सारी हैरान कर देने वाली बातें मोदी सरकार के सामने आई, सरकार को पता चला कि एक ही सीरियल नंबर के कई सारे नोट छापे गए और वो सब चलन में भी थे, साथ ही काले धन और जाली नोटों की एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही थी। इसके समाधान के लिए मोदी जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में सबसे बड़ा और कठोर निर्णय लिया नोटबंदी का, एक झटके में ये काले धन और जली नोटों की समानांतर अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। इससे कई सारे सकारात्मक परिणाम भी सामने आए, पारदर्शिता बढ़ी, अकांउटबिलिटी बढ़ी, भ्रष्ट लोगों के नाम अब सरकार के रडार पर थे।

जांच और आगे बढ़ती गई तो पता लगा कि पी चिदंबरम साहब ने 2014 चुनाव से ठीक पहले सितम्बर 2013 में वर्ल्ड बैंक से 34 अरब डॉलर का एफसीएनआर बी ऋण लिया था। इसके पीछे भी बड़ा खेल था जो सामने आया.. डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से गिर रहा था अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया कि 2014 चुनाव आते आते हो सकता है रुपया प्रति डॉलर के मुकाबले 80-90₹ के पार जा सकता है। अगस्त 2013 में यह 69 रुपया 1 डॉलर हो चुका था। चूंकि चुनाव में भी जाना था इसलिए भरी भरकम ब्याज दर वाला अल्पकालीन एफसीएनआर बी ऋण लिया गया। इससे हुआ ये कि जो रुपया अगस्त 2013 में 69 रुपया 1 डॉलर था वो अप्रैल मई 2014 में 59 रुपया 1 डॉलर हो गया। मतलब 8-9 महीने में 10 रुपया मजबूत हो गया। असल में ये मजबूती नहीं थी ये तो 34 अरब डॉलर का एफसीएनआर बी ऋण का आवरण था जो रुपए पर चढ़ाया गया था, किस लिए ?? ताकि 2014 के चुनाव में यह मुद्दा न बने। अब जब मोदी जी चुनाव जीत चुके थे तो यह ऋण भी चुकाना था 2017-18 में यह ऋण वो भी ब्याज सहित विदेशी मुद्रा में चुकाया गया जिसके कारण रुपए पर चढ़ा आवरण उतर गया और रुपया फिर 69-70₹ 1 डॉलर हो गया।

इसके बाद मोदी सरकार ने बनाया एक दिवालिया कानून बनाया। इसका नाम था इंसोलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड। इस कानून को बनाया तो स्टार्टअप इंडिया के लिए था लेकिन एनपीए की बड़ी समस्या को देखते हुए इसके प्रावधानों को सभी कंपनियों पर लागू करने का निर्णय किया गया। इस कानून के प्रावधानों की वजह से अब डिफॉल्टर्स बैंकों के चक्कर काटने लगे। ऋण का पैसा चुकाने लगे, जो नहीं चुका पाए उनकी कंपनियों को नीलाम करके वसूली की गई। लगभग 4 लाख करोड़ एनपीए रिकवर किया गया और अभी भी यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।

कई बड़े आर्थिक सुधार मोदी सरकार ने किए, जिसके बाद भ्रष्ट लोगो को जब बचने के सारे रास्ते बंद मिले तो वो या तो भागने की कोशिश में पकड़े गए या उन्होंने खुद ही सरेंडर करते हुए ईमानदारी से अपना बकाया चुकाना शुरू कर दिया। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक शुद्ध एनपीए वित्त वर्ष 2017-18 में 6% से घटकर वित्त वर्ष 2018-19 में 3.7% हो गया! 

यह मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि ही है, लैंडमाइन पर बैठी भारतीय अर्थव्यवस्था बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया मजबूत किया भारत को 5वीं अर्थव्यवस्था बनाया। 2 ट्रिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया। कांग्रेस कुशासन के लिए गए 34 अरब डॉलर एफसीएनआर बी ऋण 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का ऑयल बॉन्ड ऋण आदि विदेशी मुद्रा में चुकाया और इसके बावजूद कांग्रेस सरकार द्वारा लगभग 300 अरब डॉलर पर छोड़ा गया विदेशी मुद्रा भंडार आज बढ़कर 481 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है।

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✍️ Abhijeet Srivastava

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