Wednesday, 22 April 2020

aadhyatmik vidya

#न_गुरु_न_चेला_फ़िरे_कृपालु_अकेला....☝🏻

#प्रश्न : सांसारिक विद्या भी जब किसी गुरु के बिना नहीं आती है फिर आध्यात्मिक विद्या कैसे आएगी? शास्त्र कहते हैं कि वह गुरु से ही शिष्य को मिलती है -"आचार्यवान पुरुषो हि वेद", फिर  #आप_कैसे_कहते_हैं_कि_आप_का_कोई_गुरु_नहीं_है?

#उत्तर : 16 वर्ष के पश्चात की हमारी सब बातें लोकवत नहीं हैं, संसारी नियम-कानून के अनुसार नहीं हैं, जबकि लोग उसी के अनुसार समझना चाहते हैं। ऐसा कोई विषय नहीं है, चाहे वह संसारी हो या आध्यात्मिक, जिसको मैंने A, B, C, D से शुरू किया हो। भारत का कोई व्यक्ति बता दे कि हमने उससे कुछ सीखा हो, पढ़ा हो। एक अक्षर भी पढ़ा या सीखा हो, तब तो कहा जा सकता है कि बुद्धि तीव्र थी, इसलिए जल्दी सीख लिया। लेकिन ऐसा कोई निमित्त ही नहीं दिखाई देता। किसी ने हमें किताब लेकर पढ़ते भी नहीं देखा।

सब यही समझते हैं कि संसार में कोई निमित्त होना चाहिए। रामकृष्ण आदि अवतारों तथा आदि जगदगुरु शंकराचार्य ने भी कोई निमित्त बनाया जबकि हमने कोई निमित्त ही नहीं बनाया तो क्या बतावें। संसार वालों में इस बात को समझने की शक्ति नहीं है।

16 वर्ष की आयु में किसी व्यक्ति को एक भाषा का भी पूर्ण ज्ञान नहीं हो सकता। समस्त शास्त्र-वेदों का पूर्ण ज्ञान तो हजारों वर्ष पढ़ने पर भी नहीं हो सकता। कोई पढ़े और उसको कोई विद्या आ जाय, यह भौतिक नियम है। किसी को कोई विद्या थोड़ा पढ़ने से ही आ जाय, यह संस्कार जन्य बात है। किन्तु किसी को बिना पढ़े मिल जाय, #यह_अलौकिक_है। ऐसा उसी को होता है #जो_भगवत्शक्ति_से_जुड़_जाता_है। जब ईश्वर से किसी का कनेक्शन हो जाता है, उसे वहाँ से वह शक्ति मिल जाती है। उसको समस्त विद्याओं का ज्ञान, जिनको वह जानना चाहता है, #बिना_पढ़े_ही हो जाता है।

#जगदगुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज।

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