Sunday, 5 April 2020

PM

*PM"का मजाक'*
लोग प्रधानमंत्री का मजाक उड़ा रहे हैं। *ठीक वैसे ही जैसे इटली के लोगों ने इटली के प्रधानमंत्री जुसेप कॉन्टे* का मजाक बनाया था। उनके होम क्वारन्टाइन के अपील की खुल के धज्जियां उड़ाई थीं। उससे क्या हुआ...? वो पी एम है। उनको कुछ नहीं होना। वो आज भी जिंदा हैं। सरकार में हैं। *मरे कौन...? किसकी जान गई? किन्होंने अपने प्यारों को खोया? कौन  अपने जान से प्यारे अपनों की अंतिम झलक भी न देख पाए? वहां इतने मरे हैं कि न गाड़ने के लिए ताबूत है न जलाने के लिए लकड़ी।*

   *सरकार का कुछ नहीं जाएगा। वो चाहे तो तमाम मौतों पर महामारी की मुहर लगाकर जस्टिफाई कर देगी। शुक्र मनाओ की तुम्हें एक ऐसा पी एम मिला है जो अपनी इकॉनमी को दांव पर लगाकर तुम्हारे जान की कीमत चुकाने को तैयार है। जिसने इस समय पहली प्राथमिकता सिर्फ हिंदुस्तानियों की प्राण रक्षा को फिक्स किया है। तुम्हारे लिए हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी बहाने आ कर संवाद कर रहा है। तुम्हे प्रेरित कर रहा है, एक जुट कर रहा है, तुममें* आत्मविश्वास भरने की कोशिश कर रहा है।

*मैं रोज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की स्पीच सुनता हूँ । एक कह रहा है कि मरने के लिए तैयार रहो। आनेवाले समय मे एक लाख मौतें होंगी। तो वहीं दूसरा उस से एक कदम आगे बढ़कर करांची में 80 एकड़ का कब्रगाह खुदवा रहा है ताकि कोरोना से मरनेवालों को गाड़ते जाए।ये दोनों रोज यही अंदाजा लगाते रहते हैं कि हमारे यहां कितने मरेंगे*।

*अब आप बुरा माने या भला, यह हिंदुस्तान की अच्छी किस्मत है कि इस संकट में यहां एक सचेत और लोगों की जान की कीमत जाननेवाला और हौसला बढ़ानेवाला पी एम मिला है। इस संकट की घड़ी में एकजुट हो जाइए और प्रधानमंत्री का साथ दीजिये। बच गए तो राजनीति होती रहेगी*। कोरोना की संक्रामक शक्ति देख रहे हैं न ? सोचिए अगर लॉक डाउन न होता तो अबतक क्या स्थिति होती! *इस रोग की मृत्यु दर भले कम हो पर संक्रमण बहुत-बहुत-बहुत ज्यादा है इतनी ज्यादा की पूरे देश को चपेट में ले ले। और अगर ऐसा हुआ तो कितने लोग निपट जाएंगे पता है न? 1% यहां 1.3 करोड़ होता है।*

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