Sunday, 3 May 2020

Shri Maharaj ji

एक बार ध्यान से पढ़ें :- 
हमारे गुरूदेव श्री कृपालु महाप्रभु जी ने इस कलयुग में हम जीवों की काफी दयनिए सोचने व समझने की शक्ति , कलुषित बुद्धि , भोग विलास की लालसा से पिड़ित एवं  अधिकता और अज्ञानता के जंगल में भटकते हम जीवों के उद्धार हेतु अवतरित होकर बहुत साधारण भाषा का उपयोग करते हुए तत्त्वज्ञान दिए एवं हमारे परमकल्याण के लिए अपने जीवनलीला पर्यन्त अथक प्रयास किए । 

फिर भी कुछ नासमझ लोग श्री महाराज जी के इस साधारण भाषा में दिए गए तत्त्वज्ञान के अर्थ को भी समझने में सफल नहीं होते हैं और उनके कहे गए आदेशों , सिद्धांतों के अर्थ का अनर्थ करके सोसल मिडिया पर जहर उगलने का काम कर रहें हैं , इन लोगों से सावधान रहने की बहुत आवश्यकता है ।
ए लोग अपना तो अहित कर हीं रहें हैं बेचारे कुछ लोगों को भी बर्बाद करने का ठान लिए हैं । इनसे बचकर रहना हमारे हित में हैं 
ए लोग श्री महाराज जी के केवल एक  बात को बहुत महत्त्व देते हुए उनके बांकी सारे सिद्धांतों और तत्त्वज्ञान को भुलाए बैठे हैं । क्योंकि इनका मकसद श्री महाराज जी के कुछ एक दो बातों को हथियार बनाकर के उनके और उनके अपने जन , दास ,दासी ,‌प्रचारकों के खिलाफ  इस्तेमाल करना एक मात्र उद्देश्य है । हमें श्री महाराज जी के हरेक निर्देशों का पालन करना चाहिए नहीं तो एक दो बात का पालन करने से कुछ नहीं होगा ।

ए लोग श्री महाराज जी के अस्सी के दशक में कहें एक अंतरंग बात को सार्वजनिक करके लोगों को भ्रमित कर रहें हैं जिससे नए साधक भ्रमित होकर कौमेंट करने लगे हैं,‌सोचने लगे हैं  कि अगर गुरूदेव और हरि को रात दिन भजने वाले उनके प्रचारकों को भगवद् प्राप्ती नहीं हुई अबतक  तो उन्हें क्या लाभ होगा ......... ? आदि आदि ।

सोसल मिडिया पर कुछ क्षुद्र बुद्धि से ग्रसित ऐसे पोस्ट लिखने वाले को श्री महाराज जी के इस कथन का भानतक नहीं है कि श्री महाप्रभु जी ने स्वयं निर्देश दिया हैं कि संसार में भी किसी भगवान को भजने वाले संसारी को या साधकों को बाहर से देख कर हम साधारण जीव कदापी नहीं जान सकते कि वो क्या है और कहां तक पहुंचा है । क्या प्राप्त किया है क्या नहीं ।

फिर उनके प्रचारकों के उपर , उनके अपने जन , उनके अपने दास दासियों के उपर उनके एक बात को आधार बना कर कटाक्ष करना उनका अपमान करना है और नामापराध के सीवा कुछ भी नहीं ।

श्री महाराज जी , आध्यात्म ज्ञान एवं गुढ़ तत्त्वज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए अपने लीला काल में लगभग चालीस प्रचारक एवं प्रचारीकाओं को तत्त्वज्ञान की शिक्षा में पारंगत कराकर ,‌योग्य बनाकर , अपना बरदहस्त उनके सिर पर रखकर उनको हमारे बीच भेजें हैं हमारे कल्याण के लिए ।

 ये सभी आदरणिय प्रचारकों की अपने गुरूदेव के प्रति दृढ़ निष्ठा ,‌विश्वास, समर्पण , शरणागति , सेवा भाव काफी उच्च कोटी का है जो हमारे लिए अनुकरणीय है । और श्री महाराज जी का हीं यह निर्देश है कि हमें इन्ही प्रचारकों का अनुगमन करते हुए अपने हरि गुरू की भक्ति में आगे बढ़ना है । नहीं तो जो अपनी खोपड़ी  लगाया उसका पतन अवश्य होगा ।

 उनके सभी प्रचारक श्री महाराज जी के सिद्धांत से व उनके तत्वज्ञान से अलग कुछ भी नहीं कहते कभी । 
कुछ लोग ये भुल जातें हैं कि श्री महाराज जी ने अपने द्वारा नियुक्त अपने सभी प्रचारकों के कहे बातों का खुद गारंटी लिए हैं और कहे हैं कि" ए लोग जो कुछ भी बोलते हैं उसकी गारंटी मैं लेता हुं । ए लोग जो कुछ भी बोलते हैं उसको ध्यान से सुनों और लाभ उठाओं ।" 

 श्री महाराज जी अपने उसी समय के उसी प्रवचन के विडियो में आगे डिटेल से वो सभी बातों को समझाएं हैं पर नासमझ लोग विडियों अपने अनुसार काट छांट करके लोगों को भ्रमित कर रहें हैं उनके प्रचारकों के खिलाफ  जो एक बहुत बड़ा नामापराध  है ।

 उनके कोई भी प्रचारक कभी यह नहीं कहते की तुम मेरी पुजा करो अपने गुरू के जगह । 

अरे उनके प्रचारकों को  तो अपार दु:ख होता है जब गुरू की जगह उनका कोई तारिफ करता है ! 
और श्री महाराज जी ने तो नास्तिकों के प्रति भी दुर्भावना‌ करने से मना किएं है ।‌ उन्होंने तो हमें बतलाए हैं कि एक क्षण में कोई भी बड़े से बड़ा नास्तिक भी सबसे आगे कब बढ़ जाए और भगवद् प्राप्ति करले,  कोई नहीं जान सकता ।

दुसरा बात कि कोई भी अबतक  भगवद् प्राप्त कर लिया या नहीं हम नहीं जान सकतें हैं । क्योंकि श्री महाराज जी के सिद्धांतों को ,निर्देशों को मानने वाले उनके " गोपनियम , गोपनियम , गोपनियम वाली निर्देश का भी पालन करतें हैं ,  सौफी सदी मानते हैं और भगवद्प्रेम को छुपाते हैं । 

आज पृथ्वी पर न जाने कितने भगवद् प्राप्त संत हैं । लेकिन वो खुद को गुप्त रखतें हैं ।
और कोई भगवान के स्वरूप शक्ति विशिष्ट का अंश ,नित्य सिद्ध हीं मुल जगद्गुरू के पद को जीव कल्याण हेतु स्वीकार करतें हैं । और वहीं प्रेम दान का अधिकारी होतें हैं । शेष भगवद् प्राप्त भी अपने गुरू की हीं सेवा करते रहते हैं भगवद् प्राप्ति के उपरांत भी । और अपने को छुपाकर रखतें हैं । 

एवं स्वयं गुरूदेव भी उनके इस गोपनियता कि रक्षा करतें हैं हम जीवों के हित में । नहीं तो हम हरि गुरू की भक्ति से विमुख हो जाएंगे , और कोई भगवद् प्राप्त जीव यह नहीं चाहता है कि हम अपने हरि गुरू से  विमुख होकर उनकी भक्ति करें । लेकिन हम उनका अपमान करें यह गुरूदेव स्वीकार नहीं करते कभी ।

श्री महाराज जी के तीनों पुत्रियां , हमारी दिदियां । उनके पुत्र एवं उनके द्वारा नियुक्त प्रचारक हीं अब हमारे बीच उनका प्रतिनिधि हैं , उन्होंने स्वयं इन सभी का नियुक्ति अपने द्वारा दिए गय तत्त्वज्ञान और साधना संबंधी मैटेरियल के प्रचार प्रसार हेतु किएं हैं । जन जन तक आगे के पीढ़ियों में उनका तत्व ज्ञान का लाभ पहुंचता रहे इसी  उद्देश्य हेतु गुरूदेव ने इनको तैयार किएं है ।  आज हमारे बीच ए सभी हरिगुरू के निज जन है , हमें यह नहीं भुलना चाहिए । 

हमारे प्यारे गुरूदेव अपने लीला संवरन के  बाद अपने मुल भगवद्‌स्वरूप में अपने धाम गोलोक में हैं और हमारे ह्रदय में भी हैं ।
फिर भी उनकी प्राप्ति डाईरेक्ट , अब उतना सहज नहीं है जितना वो स्वयं अपने स्थूल शरीर में हमारे बीच थे , तब था ।

अतः अब हम सभी अपने गुरूदेव के तीनों पुत्रियां ( तीनों हमारी प्यारी दिदीयांँ ) और उनके प्रचारकों का अनुगामी होकर अपने प्यारे गुरूदेव और अपने इष्ट की अनुगात्मिका ,  रागात्मिका भक्ति करते हैं जो सर्वथा उचित है। ये सभी आदरणिय एक मार्ग और माध्यम है गुरूदेव की सेवा और भक्ति करके उनको प्राप्त करके उनसे भगवद् प्रेम दान पाने का । 
हमें इनके प्रचारकों के योगदान को नहीं भुलना चाहिए । 

और हम लोग तो श्री महाराज जी का पद् गाते हैं कि 
" हमको आप अपने  दासी के दासी के दासी के दासी बना दें । तो फिर उनके दासों का अपमान कितना बड़ा अपराध  है ।
अतः हम यह नहीं जानते की कौन क्या है इस जगत् में, इसलिए हमें सामयिक कहे गय उनके वाणी का दुरूपयोग करके उनके हीं जनों का अपमान करने का कोई हक नहीं है । 

नहीं तो ऐसे लोग ,‌ऐसा करने वाला अपना विनाश इसी तरह तर्क,  कुतर्क , अति तर्क , विचित्र विचित्र तर्क करके कर लेगें और दुसरे को भी भटका देंगें । सावधान ।  ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए । भगवान इनका भला करें , सद्बुद्धि दें ।  श्री राधे ।

Sharad Gupta bhaiya , Meenu Kapoor Didi, Prachi Gupta , didi आदि गुरूदेव के  प्रचार प्रसार में तो इनका सहयोग करके गुरूदेव की हीं सेवा कर रहें हैं । अतः आप सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि कुछ तत्काल भ्रमित करने वाले कुसंगी से दुरी बनाए रखे  बिना किसी राग ,‌द्वेष एवं दुर्भावना के ।

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