Saturday, 28 December 2019

Zindagi

जहर भरा है इस दुनिया में और इसकी दवा भी निराली है 
खोकर दुनिया की भीड़ में खुद को पाया है

हर ख्वाब को सजाना जरूरी नहीं 
हर ख्वाब का पूरा होना भी ज़रूरी नहीं 
हमेसा रोने की आदत छोडो
मिला है और भी मिलेगा
इंसान हूँ गलती करता हूँ

चलना सीखा बोलना सीखा एक दुसरे के साथ आगे बढ़ना सीखा
अकेले कैसे कटेगा सफर,  रिश्ते नाते बनाना सीखा 

उचाईयों में जाना है और ज़मीन का क़र्ज़ भी चुकाना है 
रह जाए रूह से रूह का वास्ता मिटटी तो मिटटी होनी है
पैरों के निसान दिखा दे रास्ता अगर तो सफर पूरा है 
काम आ सकें किसी के तो समझो जिन्दा हैं

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