जहर भरा है इस दुनिया में और इसकी दवा भी निराली है
खोकर दुनिया की भीड़ में खुद को पाया है
हर ख्वाब को सजाना जरूरी नहीं
हर ख्वाब का पूरा होना भी ज़रूरी नहीं
हमेसा रोने की आदत छोडो
मिला है और भी मिलेगा
इंसान हूँ गलती करता हूँ
चलना सीखा बोलना सीखा एक दुसरे के साथ आगे बढ़ना सीखा
अकेले कैसे कटेगा सफर, रिश्ते नाते बनाना सीखा
उचाईयों में जाना है और ज़मीन का क़र्ज़ भी चुकाना है
रह जाए रूह से रूह का वास्ता मिटटी तो मिटटी होनी है
पैरों के निसान दिखा दे रास्ता अगर तो सफर पूरा है
काम आ सकें किसी के तो समझो जिन्दा हैं
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